जनतेचा कवी –शैलेंद्र
रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार काज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार काके मर के भी किसी को याद आयेंगेकिसी के आँसुओं में मुस्कुराएँगेकहेगा फूल… Read More »जनतेचा कवी –शैलेंद्र
रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार काज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार काके मर के भी किसी को याद आयेंगेकिसी के आँसुओं में मुस्कुराएँगेकहेगा फूल… Read More »जनतेचा कवी –शैलेंद्र
उन्हाळ्याची सुट्टी पडली होती आणि रविवार होता. दूरदर्शनवर कसला तरी भंकस सिनेमा म्हणून आम्ही मैत्रिणी फिरायला जात होतो. अचानक “रात और दिन” चे टायटल सॉंग… Read More »मेरी आँखो में बस गया कोई रे.